Friday, June 21, 2013

"हे भोले भंडारी" (केदारनाथ में महादेव का तांडव)

हे भोले भंडारी,

भक्तों का अपराध तो बताओ त्रिपुरारी ?

क्या सारे भक्त थे पापी ?

जो तुमने अपना त्रिनेत्र खोल डाली,

सही-सलामत है जब गिरिराज कुमारी,

फिर क्यों तुमने भयानक तांडव है मचाई ? 


माना कि भक्तों में थे कुछ नेता और अपराधी ,

इसकेलिए हजारों निर्दोष को सजा क्यों दी ?

क्यों चढ़ा रखी थी भांग तुमने इतनी ?

कि अपने अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया तुमने,

क्या रह गया फर्क देवता और क्रूर दानव में ?

जब निर्दोषों के खून से रंगे हों दोनों....."ReNu"

                  

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Monday, June 17, 2013

"उमड़ हैं आई बदरी सावन की"

उमड़ हैं आई बदरी सावन की ,
दमके दामिनी गरज-गरज के !
निशि अंधियारी जिया घबराये ,
सुधि नहीं मेरी साजन को आये !!

वैरन हो गई मेरी हँसी-ठिठोली ,
रूठ के हैं पिया परदेश सिधारे !
जब से गए कोई चिठ्ठी न पत्री ,
कबसे खड़ी हूँ द्वार बाट निहारे !!"ReNu"
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Monday, May 27, 2013

! भगवान बन न मंदिर में बैठ !

दे इतनी न पीड़ा मुझको ,
कि तुम से नफरत कर बैठूं !
दे इतनी न खुशियाँ मुझको ,
कि दर्द औरों का समझ न सकूँ !!

दे इतना न आंसूं मुझको ,
कि अस्तित्व तेरा ही बह जाये !
फिर कोई न पूजे तुमको ,
न कोई तुम पर विश्वास करे !!

कुछ तो ऐसा तू खेल रचा ,
अपने होने का प्रमाण तो दे !!
भगवान बन न मंदिर में बैठ ,
आ साथी बनकर गले लगा !!

आ फिर से बंसी की धुन से ,
जानवरों में भी प्यार जगा !
आ कर फिर से मानवता का  ,
मानव को तू  का पाठ पढ़ा !!

मधुर मुरली की धुन अब तेरी ,
और नहीं दिल बहला पायेगी !
मुरली त्याग, सुदर्शन पकड़ ,
नहीं तो मानवता शर्मसार हो जाएगी !! "ReNu"



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Tuesday, April 30, 2013

मत रौंदो इस तरह मुझको,
सुकून से बचपन तो जीने दो !
जरा सब्र तो करो रावणों,
पहले सीता तो मुझे बनने दो !! "ReNu"

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Sunday, April 7, 2013

! युवाओं को समर्पित !

परेशानी और बाधाओं को,
अपने पैरों के निचे रख दे !
बनने न दे इसे पथ का रोड़ा,
मंजिल की सीढ़ी बना ले !!

तू कौन है, क्या है,
यह दुनिया को आज दिखा दे !
मत चल औरों के पदचिन्हों पर,
खुद अपना पदचिन्ह बना ले !!

परवाह नहीं कर दुनियाँ की,
क्या तेरे बारे में वो कहता है !
मतलब केवल उन बातों का,
जो तू अपने आप से कहता है !!

व्यर्थ न गवा समय अपना,
तू सोच के औरों के बारे में !
मत कर औरों से अपनी तुलना,
जो दूर ले जाये तुमको खुद से !!

सबसे ऊपर जाकर जो बैठता है,
वह श्रेष्ठ नहीं हो जाता है !
अपने आप से ऊपर उठ कर तू,
श्रेष्ठता का मतलब उनको समझा दे !!"ReNu"


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Thursday, April 4, 2013

! आ कर देखो बस एक बार !

चाँद सितारों में जाकर ढूंढा,
मेघ बयारों से जाकर पूछा,
जाने वाले कहाँ चले जाते हैं,
दे ठौर-ठिकाना उनका बता !!

ओ महायात्रा पर जाने वाले,

क्यों लौट नहीं घर को आते,
दिवाली तुम्हारे बिना फीका,
होली का रंग भी बेरंग हुआ !!

आ कर देखो बस एक बार,
कितना सब कुछ है बदल गया,
अपने बगीचे की नन्ही कलियाँ
देखो खिलकर सौम्य फूल बना !!


मैं भी पहले जैसी कहाँ रही,

छा गयीं झुर्रियां, उम्र बढ़ा,
आँखों पर चढ़ा मोटा चश्मा,
सर का आधा बाल सफेद हुआ !!

जाना ही था तो चले जाते,
पर इतना तो करते जाते,
यादों की अपनी पोटली भी,
अपने साथ ही लेकर जाते !!

क्यों जाने के बाद भी साथी,
तुम दिल के अंदर रहते हो,
दिल को हर पल निचोड़ कर,
आंसुओं से सिंचित फलते-फूलते हो !!"ReNu"


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Wednesday, March 27, 2013

! ये न तेरा शहर ये न मेरा शहर !

ये न तेरा शहर ये न मेरा शहर
ईंट पत्थर से बने इंसानों का शहर
रोज मरते हम रोज बिकते हैं हम
चंद लोगों की मर्जी पर जीते हैं हम
इंसानों का नहीं ये हैवानों का शहर !!

        ये न तेरा शहर ये न मेरा शहर......
 

माँ बहनों की लगती यहाँ बोलियाँ
रोटियों के लिए वो हैं बिकती यहाँ
संबंधों की उड़ रही है यहाँ धज्जियाँ
सम्पत्ति के लिए हो रहे क़त्ल यहाँ
पैसों का शहर ये जमीनों का शहर !!

          ये न तेरा शहर ये न मेरा शहर......
 

मंदिर-मस्जिद में बांटे हुए हैं हमें
क्षेत्र, भाषा के नाम पर लड़वाते हमें
हमें खेलाकर यहाँ खून की होलियाँ
खुद वहाँ मना रहे हैं
वो रंगरेलियाँ
नेताओं का शहर धर्मगुरुओं का शहर !!

         ये न तेरा शहर ये न मेरा शहर......"ReNu"
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